उन्नाव। श्री राघव सनातन सेवा संस्थान (रजि.), उन्नाव के तत्वावधान में वृंदावन गार्डन, आवास विकास, उन्नाव में आयोजित 16वें श्री रामलीला महोत्सव में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला में कुंभकर्ण वध, मेघनाद वध, रावण वध, भरत मिलाप तथा भगवान श्रीराम के राजतिलक की लीलाओं ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
रामलीला के दौरान सर्वप्रथम कुंभकर्ण वध एवं मेघनाद वध की लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान श्रीराम की सेना और राक्षस सेना के बीच हुए युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। इसके पश्चात रामलीला का सबसे रोमांचक एवं प्रभावशाली प्रसंग भगवान श्रीराम और लंकापति रावण के बीच महासंग्राम के रूप में प्रस्तुत किया गया। दोनों ओर से हुए भीषण युद्ध के उपरांत भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर उसके अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत किया। रावण के धराशायी होते ही पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ भगवान श्रीराम की जय-जयकार की।
रावण वध की लीला ने यह संदेश दिया कि अहंकार, अत्याचार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य, धर्म और सदाचार की ही होती है। इस प्रसंग के माध्यम से बुराई पर अच्छाई तथा असत्य पर सत्य की विजय का शाश्वत संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
इसके उपरांत भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के मिलन अर्थात भरत मिलाप का अत्यंत भावपूर्ण मंचन हुआ। लंबे समय के विरह के बाद दोनों भाइयों के मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। भरत मिलाप के माध्यम से भाईचारे, त्याग, प्रेम, निष्ठा और पारिवारिक मर्यादाओं का अनुपम संदेश दिया गया।
अंत में भगवान श्रीराम के राजतिलक की भव्य लीला संपन्न हुई। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और राजसिंहासन पर विराजमान होने के प्रसंग ने रामराज्य की परिकल्पना को साकार रूप में प्रस्तुत किया। यह संदेश दिया गया कि आदर्श शासन वही है, जिसमें न्याय, समानता, करुणा, जनकल्याण और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो। रामलीला के इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सदर विधायक पंकज गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी एवं शशांक शेखर सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। अतिथियों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को भारतीय परंपराओं, सामाजिक समरसता और नई पीढ़ी में संस्कारों के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
इस अवसर पर संस्थान के संरक्षक राम तनेजा एवं अजय शुक्ला, अध्यक्ष कुंवर आर. एस. चौहान (एडवोकेट), महामंत्री जी. एस. भदौरिया, कोषाध्यक्ष आशीष शुक्ला तथा महिला अध्यक्ष श्रीमती निम्मी अरोड़ा सहित संस्थान के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
श्री राघव सनातन सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 16वें श्री रामलीला महोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और मर्यादा का संदेश दिया जा रहा है। रामलीला के मंचन ने एक बार फिर इस शाश्वत सत्य को स्थापित किया कि धर्म के मार्ग पर चलने वाले की विजय होती है और अहंकार का अंत निश्चित है।
